राजस्थान की राजधानी और 'पिंक सिटी' जयपुर को साफ-सुथरा और स्वच्छ बनाने के लिए नगर निगम और प्रशासन द्वारा एक बेहद आधुनिक कदम उठाया गया है। शहर की सफाई व्यवस्था को पूरी तरह सुदृढ़ और हाई-टेक करने के उद्देश्य से पहली बार मैकेनिक लिटर पिकर मशीनों (Mechanical Litter Picker Machines) को धरातल पर उतारा गया है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस विशेष स्वच्छता अभियान के तहत शुरुआती चरण में पांच (5) अत्याधुनिक मैकेनिक लिटर पिकर मशीनें काम पर लगाई गई हैं। इन मशीनों की सबसे बड़ी खासियत इनकी विशाल क्षमता और संकरे इलाकों में पहुंचने की सुगमता है।
क्या हैं इन मशीनों की विशेषताएं और क्षमता?
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1500 लीटर की विशाल क्षमता: प्रत्येक मैकेनिक लिटर पिकर मशीन की स्टोरेज क्षमता 1500 लीटर है, जो भारी मात्रा में बिखरे कचरे को एक बार में अपने अंदर समेट सकती है।
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सक्शन और कलेक्टिंग तकनीक: यह मशीनें आधुनिक सक्शन (सफाई खिंचाव) तकनीक पर काम करती हैं, जिससे सड़क पर पड़ा प्लास्टिक, कागज, सूखी पत्तियां और अन्य हल्का-भारी कचरा तेजी से साफ हो जाता है।
किन चुनौतीपूर्ण स्थानों पर किया जा रहा है इनका उपयोग?
जयपुर के उन संवेदनशील और संकरे इलाकों को इसके लिए चिह्नित किया गया है, जहां आमतौर पर पारंपरिक सफाई कर्मचारी या बड़ी मशीनें नहीं पहुंच पाती थीं। इन मशीनों का मुख्य फोकस निम्नलिखित क्षेत्रों पर है:
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संकरे और मुश्किल स्पेस: बिजली के ट्रांसफार्मर के नीचे जमा होने वाला कचरा, मुख्य सड़कों के किनारे बने फुटपाथ और डिवाइडर के कोने।
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नो-गो ज़ोन (बड़ी मशीनों के लिए): ऐसे दुर्गम स्थान जहां भारी-भरकम मशीनें जैसे जेसीबी (JCB), लोडर, या बड़े मैकेनिक रोड स्वीपर अपने आकार के कारण सफाई करने में पूरी तरह असमर्थ रहते हैं।
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हाई-फुटफॉल कमर्शियल एरिया: पैदल यात्रियों की भारी आवाजाही वाले प्रमुख बाजार, चिह्नित व्यावसायिक स्थल और कचरा डिपो के आसपास के क्षेत्र जहां लगातार गंदगी जमा होती है।
जयपुर नगर निगम का यह प्रयास न केवल शहर की सड़कों को चमकाएगा, बल्कि मैन्युअल स्कैवेंजिंग (हाथ से कचरा उठाने की प्रक्रिया) को कम करके सफाई कर्मचारियों के काम को भी आसान और सुरक्षित बनाएगा। त्योहारों और पर्यटन सीजन से पहले जयपुर के सौंदर्य को बनाए रखने के लिए इसे एक गेम-चेंजर कदम माना जा रहा है।