जयपुर न्यूज डेस्क: जयपुर पुलिस ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी, फर्जी बैंक खातों और क्रिप्टो-हवाला नेटवर्क का खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड विकास ढाका (30) को वैशाली नगर स्थित उसके फ्लैट से गिरफ्तार किया है। वह सीकर के बासनी बराला का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी गरीबों और मजदूरों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाता था। इन खातों में साइबर ठगी की रकम जमा कराकर उसे सफेद धन में बदलने का काम करता था। पिछले दो साल में वह करीब 24 करोड़ रुपये की ठगी की रकम को सफेद धन में बदल चुका है। नेटवर्क बढ़ाने के लिए वह करीब 20 दिन पहले जयपुर आया था।
यूएसडीटी और क्रिप्टो करेंसी के जरिए चल रहा था गिरोह
डीसीपी (वेस्ट) प्रशांत किरण ने बताया कि 27 अक्टूबर को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि वैशाली नगर की नेमी सागर कॉलोनी स्थित एक अपार्टमेंट में विकास ढाका अपने साथियों के साथ रह रहा है। आरोप है कि वह यूएसडीटी और क्रिप्टो करेंसी के अवैध लेन-देन के जरिए साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क चला रहा था। इसके बाद एडिशनल डीसीपी राजेश गुप्ता और प्रो. आईपीएस अदिति उपाध्याय की निगरानी में टीम बनाई गई। वैशाली नगर थानाधिकारी अरविंद सिंह और डीएसटी प्रभारी गणेश सैनी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने फ्लैट पर छापा मारकर विकास को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में विकास का हवाला, फर्जी बैंक खातों और क्रिप्टो करेंसी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में मास्टरमाइंड के तौर पर काम करना सामने आया। उसे साइबर क्राइम से जुड़े कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उसके फ्लैट से 9 मोबाइल फोन, 8 फिनो पेमेंट डेबिट कार्ड किट और गूगल पे स्कैनर रोल बरामद किए हैं।
मजदूरों के दस्तावेजों का करता था इस्तेमाल
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी जैसलमेर और सीकर के आसपास के इलाकों में रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट में काम करने वाले गरीब और सीधे-साधे मजदूरों को पैसों का लालच देता था। इसके बाद उनके पहचान पत्रों और केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर निजी बैंकों और पेमेंट्स बैंकों में चालू और बचत खाते खुलवाता था। साथ ही एयरटेल पेमेंट्स बैंक के मर्चेंट क्यूआर कोड भी तैयार करवाता था। आरोप है कि इन खातों को अवैध ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म चलाने वालों के साथ देशभर के साइबर अपराधियों को मोटे कमीशन पर बेच दिया जाता था। ठगी और सट्टेबाजी की रकम इन्हीं खातों में जमा कराई जाती थी।
क्रिप्टो करेंसी के जरिए रकम को सफेद बनाता था
डीसीपी प्रशांत किरण के मुताबिक, विकास ठगी से मिली रकम को तुरंत क्रिप्टो करेंसी में बदल देता था। इसके बाद दुबई से जुड़े हवाला और क्रिप्टो नेटवर्क के जरिए रकम को वापस भारतीय बाजार में सफेद धन के रूप में खपाया जाता था। फिलहाल पुलिस की तकनीकी और साइबर सेल की टीम जब्त किए गए मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कर रही है। इसके साथ ही सिंडिकेट से जुड़े दूसरे एजेंटों, हवाला कारोबारियों और विदेश में मौजूद संपर्कों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।