जयपुर न्यूज डेस्क: राजस्थान में एनएसयूआई नेता ऋतु बराला के साथ कथित मारपीट के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं ने जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में धरना दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सोमवार, 19 अक्टूबर की शाम पार्टी नेताओं के साथ कमिश्नरेट पहुंचे और रातभर वहीं रुके। पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने के विरोध में नेताओं ने गलियारे में रात बिताई। मंगलवार, 20 अक्टूबर को नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस की कई महिला विधायक भी प्रदर्शन में शामिल हुईं। कमिश्नरेट के बाहर जुटे पार्टी कार्यकर्ताओं की संख्या भी बढ़ गई।
प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने कमिश्नरेट का मुख्य गेट बंद कर दिया और बैरिकेडिंग लगाकर कार्यकर्ताओं को परिसर में जाने से रोका। सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया। बाहर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग करते रहे। कांग्रेस विधायक रफीक खान समेत पार्टी के कुछ नेता पहले से ही कमिश्नरेट के अंदर मौजूद थे।
टीकाराम जूली ने सवाल उठाया कि जब कानून में जीरो एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान है, तो पुलिस मामला दर्ज करने से क्यों बच रही है। रफीक खान ने कहा कि राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष को भी शुरुआत में कमिश्नरेट में प्रवेश नहीं करने दिया गया और काफी कोशिशों के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया। कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र भारद्वाज ने भी आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी जीरो एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर रहे हैं, जबकि यह कानूनी प्रावधान है। उन्होंने सवाल किया कि महिला के साथ कथित मारपीट के मामले में एफआईआर क्यों नहीं लिखी जा रही, जबकि केंद्र सरकार नारी वंदन पहल के जरिए महिला सशक्तीकरण की बात करती है।
डोटासरा ने कहा कि ऋतु बराला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने तक कांग्रेस नेता धरना खत्म नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस को लगता है कि कांग्रेस नेताओं ने सरकारी काम में बाधा डाली है, तो वह उनके खिलाफ भी मामला दर्ज कर सकती है, लेकिन वे एफआईआर दर्ज कराए बिना वहां से नहीं हटेंगे। डोटासरा ने यह भी कहा कि देश में कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए। उनके मुताबिक, जब गैर-बीजेपी शासित राज्य में जीरो एफआईआर दर्ज हो सकती है, तो राजस्थान में ऐसा करने में क्या परेशानी है। उन्होंने कहा कि पार्टी न्याय की मांग से पीछे नहीं हटेगी।
दरअसल, डोटासरा सोमवार शाम ऋतु बराला और अन्य नेताओं के साथ पहले मोती डूंगरी पुलिस थाने पहुंचे थे। वहां पुलिस ने उनकी शिकायत तो ले ली, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद वे पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे और एक वरिष्ठ अधिकारी के सामने अपनी मांग रखी। इस दौरान कमिश्नरेट के बाहर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता जमा हो गए, जिसके बाद पुलिस ने मुख्य गेट बंद कर सुरक्षा बढ़ा दी।
यह मामला 13 अक्टूबर को दिल्ली में हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा है। एनएसयूआई ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के पास प्रदर्शन किया था। ऋतु बराला ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों को ले जा रही बस के अंदर दिल्ली पुलिस की महिला कांस्टेबल चंचल यादव ने उनके साथ मारपीट की। उनके मुताबिक, कांस्टेबल ने उनका गला पकड़ा, सीट पर धकेला, चेहरे पर खरोंच मारी और थप्पड़ भी मारा।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 16 अक्टूबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस कथित घटना का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान केरल की अथिरा और राजस्थान की ऋतु बराला के साथ मारपीट की। राहुल गांधी के मुताबिक, केरल में इस मामले में जीरो एफआईआर दर्ज हो चुकी है और कांग्रेस संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग जारी रखेगी। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा भी पहले इस कथित मारपीट की निंदा कर चुके हैं और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।