जयपुर न्यूज डेस्क: जयपुर रोपवे परियोजना से जुड़े कथित अतिक्रमण और वन भूमि पर अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की भोपाल स्थित केंद्रीय पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकरण ने राजस्थान वन विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश देते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकन रिपोर्ट) दाखिल करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान वन विभाग और संयुक्त समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि रोपवे का अपर स्टेशन, लोअर स्टेशन और कॉरिडोर का कुछ हिस्सा उस भूमि से बाहर बनाया गया है, जिसे परियोजना के लिए कानूनी मंजूरी मिली थी। रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्माण आरक्षित वन क्षेत्र में होने की आशंका है।
जांच में यह भी सामने आया कि इलाके में बिना अनुमति रेस्तरां, फिश स्पा और बॉडी मसाज पार्लर संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा खुले में खाना बनाना, प्लास्टिक कचरे का गलत तरीके से निपटान, बिना अनुमति लाइटिंग और पर्यावरणीय मंजूरी के बिना जिपलाइन साइकिल राइड चलाने जैसी अनियमितताएं भी पाई गईं।
एनजीटी ने कहा कि मामला एक साल से अधिक समय से लंबित है, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसे गंभीर मानते हुए अधिकरण ने राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को पूरे मामले की व्यक्तिगत निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अवैध कब्जे वाली वन भूमि को खाली कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को भी कहा गया है।
अधिकरण ने आदेश दिया है कि पीसीसीएफ या उनके अधिकृत मुख्य वन संरक्षक (CCF) स्तर के अधिकारी दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को होगी।