जयपुर न्यूज डेस्क: जयपुर के त्रिपोलिया बाजार स्थित मणिहारों का कटला में गुरुवार सुबह सेठी कॉम्प्लेक्स में अचानक आग लग गई। तीन मंजिला इमारत की दूसरी मंजिल पर मौजूद चूड़ियों के गोदाम से सुबह करीब 7 बजे आग शुरू हुई। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को इसकी वजह बताया जा रहा है। देखते ही देखते आग ने करीब 25 दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। इनमें कपड़े, प्लास्टिक का सामान, कॉस्मेटिक और चूड़ियों के गोदाम व दुकानें शामिल थीं।
आग की सूचना के बाद सुबह करीब 8 बजे दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। करीब 30 फायर टेंडर और 50 कर्मचारी कई घंटे तक आग बुझाने में जुटे रहे और दोपहर करीब 2:30 बजे आग पर काबू पाया गया। सुरक्षा के लिए इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई थी। बिल्डिंग में रखे पांच कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों को भी फायरकर्मियों ने बाहर निकाल लिया। आग का धुआं सुभाष चौक से चांदपोल तक फैल गया, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन हुई। आग से करीब 4 किलोमीटर का इलाका प्रभावित रहा और बड़ी चौपड़, जौहरी बाजार व त्रिपोलिया बाजार में ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। एक दुकान की दीवार भी गिर गई।
घटना के वक्त बिल्डिंग में मौजूद गार्ड विक्रम सिंह ने बताया कि वह तीन सफाईकर्मियों के साथ गोदाम में था। उनके मुताबिक, शॉर्ट सर्किट के बाद आग तेजी से फैलने लगी, जिसके बाद उन्होंने ताला तोड़ा और शटर उठाकर बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। इस दौरान गर्म शटर से उनका हाथ भी झुलस गया। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट सामने आया है। माणक चौक थाना अधिकारी राकेश ख्यालिया ने बताया कि बिल्डिंग की फायर एनओसी की भी जांच की जाएगी। धुआं दिखाई देने के बाद पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई थी।
आग के बाद कॉम्प्लेक्स की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया कि बिल्डिंग में लगे फायर सेफ्टी उपकरण काम नहीं कर रहे थे। किशनपोल से कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने आरोप लगाया कि करीब पौने तीन साल से फायर सिस्टम की जांच नहीं हुई। वहीं, हवामहल से बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य ने पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान स्मार्ट सिटी के नाम पर खर्च हुए पैसों और फायर सिस्टम से जुड़ी एनओसी की जांच की मांग की। स्थानीय व्यापारी अनीस चंदवानी ने आरोप लगाया कि बिल्डिंग की ऊपरी मंजिल पर अवैध रूप से रेस्टोरेंट-होटल बनाने का काम चल रहा था और सुबह वेल्डिंग की जाती थी। उनके मुताबिक, स्थानीय व्यापारी पहले भी इसका विरोध कर चुके हैं।