जयपुर न्यूज डेस्क: राजस्थान की राजधानी जयपुर में यूजीसी रेगुलेशंस 2026 और सवर्ण समाज से जुड़े अन्य मुद्दों के विरोध में निकाली गई राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की 'सवर्ण न्याय यात्रा' के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। सरकार का कहना है कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की, जबकि करणी सेना ने शांतिपूर्ण मार्च पर बल प्रयोग का आरोप लगाया।
करीब 24 दिनों तक चली यह यात्रा बीकानेर के देशनोक से शुरू होकर जयपुर पहुंची थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपना चाहते थे।
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने कालवाड़ पुल और चौमूं पुलिया के पास बैरिकेड्स हटाने और प्रतिबंधित क्षेत्र में आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद धक्का-मुक्की हुई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प भी हुई। बाद में प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम अपना ज्ञापन सौंप दिया।
करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने आरोप लगाया कि यात्रा शांतिपूर्ण थी, इसके बावजूद पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो राजस्थान के मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
यूजीसी रेगुलेशंस 2026 का विरोध क्यों?
यूजीसी रेगुलेशंस 2026 को 13 जनवरी को अधिसूचित किया गया था। आयोग का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव रोकना और समान अवसर सुनिश्चित करना है। हालांकि, करणी सेना समेत सामान्य वर्ग के कई संगठनों का आरोप है कि इन नियमों में शिकायतों के दुरुपयोग से बचाव के पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं और इससे सामान्य वर्ग के छात्रों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
इन नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को इनके क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। जयपुर की यह यात्रा इन्हीं नियमों को वापस लेने या उनमें संशोधन की मांग के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और मेरिट आधारित अवसरों की मांग को लेकर निकाली गई थी।