जयपुर न्यूज डेस्क: जयपुर में शनिवार रात चुनाव ड्यूटी के लिए निजी वाहन लेने को लेकर आरटीओ टीम और एक परिवार के बीच करीब दो घंटे तक विवाद चलता रहा। मामला विश्वकर्मा रोड का है, जहां सीकर से जयपुर लौट रहे परिवार की टोयोटा हिलक्स एसयूवी को विद्याधर नगर की आरटीओ-II टीम ने रोक लिया। परिवार का आरोप है कि अधिकारियों ने वाहन को नगर निकाय चुनाव की ड्यूटी में लगाने की बात कही, लेकिन मौके पर कोई लिखित आदेश नहीं दिखाया।
परिवार के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर ने बताया कि जयपुर की करीब 18 टोयोटा हिलक्स गाड़ियों को चुनावी ड्यूटी के लिए लिया जा रहा है और उनकी गाड़ी भी इस सूची में है। परिवार ने कहा कि वाहन में महिलाएं और पालतू कुत्ता मौजूद था, इसलिए उन्हें कुछ मिनट दिए जाएं ताकि वे दूसरी व्यवस्था कर सकें। आरोप है कि अधिकारियों ने तुरंत गाड़ी खाली करने को कहा और ऐसा नहीं करने पर पुलिस में शिकायत और गिरफ्तारी की चेतावनी दी।
मामला बढ़ने के बाद यह घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गई। एक्स पर लोगों ने वीडियो और पोस्ट शेयर कर आरटीओ की कार्रवाई पर सवाल उठाए। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि परिवार को गाड़ी से उतरने के लिए धमकाया गया और एक अधिकारी ने कथित तौर पर वाहन चढ़ा देने की बात भी कही। हालांकि, इन सोशल मीडिया दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, परिवहन विभाग ने बाद में वाहन में नियमों के खिलाफ किए गए कथित बदलाव को लेकर चालान और जब्ती की कार्रवाई शुरू करने की बात कही।
ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर अनिल बसवाल ने पीटीआई को बताया कि हिलक्स में नियमों का उल्लंघन करते हुए मॉडिफिकेशन किया गया था और इसी आधार पर कार्रवाई की गई। उनका कहना था कि परिवार को ऑटो रिक्शा की सुविधा भी दी गई, लेकिन वहां हंगामा किया गया। परिवार का कहना है कि मौके पर मुख्य वजह चुनावी ड्यूटी के लिए वाहन मांगा जाना बताई गई थी, मॉडिफिकेशन का मुद्दा बाद में सामने आया। आखिरकार पुलिस के पहुंचने पर विवाद शांत हुआ, आरटीओ टीम वहां से चली गई और वाहन परिवार को वापस मिल गया। लोकसभा चुनाव से जुड़े कानून की धारा 160 के तहत चुनावी काम के लिए वाहनों का इस्तेमाल कराया जा सकता है, लेकिन इसके लिए वाहन मालिक या कब्जे में रखने वाले व्यक्ति को लिखित आदेश देना जरूरी है।