जयपुर न्यूज डेस्क: राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित तीन दिवसीय कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस 2026 का समापन 'जयपुर डिक्लेरेशन ऑन पीस मेडिएशन 2026' को अपनाने के साथ हुआ। इस घोषणा में राष्ट्रमंडल देशों के न्यायिक तंत्र में शांति, न्याय और कानून के शासन को मजबूत करने के लिए मध्यस्थता (मेडिएशन) को अहम आधार बताया गया। इसी दौरान राजस्थान हाईकोर्ट की डिजिटल पहल 'न्यायायन – द डिजिटल वे ऑफ जस्टिस' भी लॉन्च की गई, जिसका उद्देश्य राज्य की अदालतों में पेपरलेस कार्यप्रणाली को बढ़ावा देना है।
31 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित इस सम्मेलन का आयोजन राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA) ने राजस्थान हाईकोर्ट, कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और निवारण के सहयोग से किया। सम्मेलन में भारत सहित कई राष्ट्रमंडल देशों के न्यायाधीश, वरिष्ठ वकील, मध्यस्थ, शिक्षाविद और कानूनी विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन का मुख्य विषय 'पीस मेडिएशन एंड द रूल ऑफ लॉ' रहा।
उद्घाटन सत्र में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि मध्यस्थता को न्याय व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि विवादों का समाधान संवाद, कम मुकदमों और सुलभ न्याय के जरिए हो सके।
सम्मेलन के दूसरे दिन परिवार, आपराधिक मामलों, व्यापारिक विवादों, कार्यस्थल और सार्वजनिक परियोजनाओं से जुड़े मामलों में मध्यस्थता की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि मेडिएशन को अंतिम विकल्प नहीं, बल्कि विवाद समाधान का पहला माध्यम बनाया जाना चाहिए।
समापन समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और कई अंतरराष्ट्रीय न्यायाधीश शामिल हुए। इस दौरान 'न्यायायन – द डिजिटल वे ऑफ जस्टिस' सॉफ्टवेयर लॉन्च किया गया। इसके जरिए राजस्थान की 1,495 अदालतों और 1,517 न्यायिक अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से पेपरलेस प्रणाली से जोड़ा जाएगा। शुरुआत में इसका इस्तेमाल 36 नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट कोर्ट और 12 कमर्शियल कोर्ट में किया जाएगा।
सम्मेलन के अंत में अपनाए गए जयपुर डिक्लेरेशन ऑन पीस मेडिएशन 2026 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर, कॉमनवेल्थ चार्टर और भारत के मेडिएशन एक्ट 2023 से प्रेरणा लेते हुए मध्यस्थता को न्याय व्यवस्था का प्रभावी और मानवीय माध्यम बताया गया। इसमें न्याय तक आसान पहुंच, अदालतों में लंबित मामलों को कम करने, सामाजिक सौहार्द बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया।