जयपुर न्यूज डेस्क: महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन कानून लागू किया है और राजस्थान के निकाय चुनावों में भी महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित हैं। लेकिन जयपुर नगर निगम की पहली बैठक में इसका एक अलग ही उदाहरण देखने को मिला। जनता ने जिन महिलाओं को पार्षद चुनकर सदन में भेजा, उनमें से कुछ की जगह उनके पति और ससुर ‘पार्षद प्रतिनिधि’ बनकर बैठक में पहुंच गए। इस मामले ने महिला सशक्तिकरण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंगलवार को जयपुर नगर निगम के पार्षदों की पहली बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता महापौर सुनील कोठारी ने की। बैठक में कुछ महिला पार्षदों के साथ उनके पति पहुंचे तो एक पार्षद की जगह उनके ससुर भी मौजूद रहे। वार्ड नंबर 7 से कांग्रेस की पूनम तिवाड़ी बैठक में आईं, लेकिन उनके पति प्रदीप तिवाड़ी भी उनके साथ बैठे। प्रदीप ने कहा कि उनकी पत्नी को बैठक का अनुभव नहीं है, इसलिए वह साथ आए हैं। वहीं वार्ड नंबर 8 की निर्दलीय पार्षद मंजू शर्मा बैठक में नहीं पहुंचीं और उनकी जगह उनके पति दिनेश कांवट आए। दिनेश पहले भाजपा से पार्षद रह चुके हैं और इस बार टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी को निर्दलीय चुनाव लड़ाया था।
इसी तरह वार्ड नंबर 18 की कांग्रेस पार्षद वंदिता शर्मा की जगह उनके ससुर अरविंद कूलवाल बैठक में पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनकी बहू की तबीयत खराब थी, इसलिए वह बैठक में नहीं आ सकीं। वार्ड नंबर 20 से भाजपा की डॉ. उदिता चौहान के साथ उनके पति मालसिंह शेखावत भी ‘पार्षद प्रतिनिधि’ के तौर पर बैठक में मौजूद रहे। मालसिंह ने भी यही वजह बताई कि उनकी पत्नी को बैठक का अनुभव नहीं है, इसलिए वह उनके साथ आए हैं।
महापौर सुनील कोठारी ने बैठक में पति और ससुर के पहुंचने पर उन्हें बाहर नहीं निकाला। उनका कहना है कि ये लोग बैठक शुरू होने से पहले ही अपनी जगह बैठ गए थे और बैठक शुरू होने के बाद उन्हें उठाना उचित नहीं लगा। हालांकि महापौर ने साफ किया कि आगे से ऐसी स्थिति नहीं होगी और नगर निगम की बैठकों में सिर्फ निर्वाचित पार्षदों को ही प्रवेश दिया जाएगा।