जयपुर न्यूज डेस्क: जयपुर के प्रसिद्ध गलता जी मंदिर में बड़ी संख्या में बंदर एक गंभीर त्वचा रोग हाइपरकेराटोसिस से पीड़ित पाए गए हैं। इस बीमारी के कारण बंदरों के बाल झड़ रहे हैं, त्वचा फट रही है, घावों से खून निकल रहा है और कई बंदरों को चलने-फिरने और पेड़ों पर चढ़ने में भी दिक्कत हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में यह समस्या तेजी से बढ़ी है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, धार्मिक आस्था के चलते लोगों द्वारा बंदरों को लगातार लड्डू, चना, मखाना, बिस्कुट और अन्य मीठी चीजें खिलाने से उनकी प्राकृतिक खान-पान की आदतें बदल गई हैं। वरिष्ठ वन्यजीव पशु चिकित्सक डॉ. अशोक तंवर ने बताया कि अत्यधिक मीठा और प्रोसेस्ड फूड खाने से बंदरों में एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, जिससे हाइपरकेराटोसिस जैसी बीमारी फैल रही है।
वन विभाग ने लोगों को जागरूक करने के लिए मंदिर परिसर और आसपास चेतावनी बोर्ड लगाए हैं। क्षेत्रीय वन अधिकारी जितेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि लोगों से बंदरों और लंगूरों को मिठाई या प्रोसेस्ड फूड न खिलाने की अपील की जा रही है। संक्रमित बंदरों को पकड़कर इलाज के लिए जयपुर चिड़ियाघर भेजने की भी कोशिश की जा रही है, हालांकि उनकी फुर्ती के कारण यह काम चुनौतीपूर्ण है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बंदरों का प्राकृतिक भोजन जड़ें, फल, पत्तियां और सब्जियां हैं। यदि उन्हें दोबारा प्राकृतिक आहार और उनके अनुकूल वातावरण मिल जाए, तो अधिकांश बंदरों की हालत में सुधार हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि लोगों ने बंदरों को मीठी चीजें खिलाना बंद नहीं किया, तो यह बीमारी और अधिक फैल सकती है।