जयपुर न्यूज डेस्क: राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रसिद्ध आमेर किले (Amer Fort) में पर्यटकों के बीच हाथी सवारी (Elephant Rides) की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है। लोकल ट्रैवल एजेंसियों और गाइडों के अनुसार, विदेशी ट्रैवल कंपनियों ने इसे अपने टूर पैकेज और कार्यक्रमों से हटा दिया है। जो हाथी सवारी कभी राजसी अनुभव मानी जाती थी, अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटक उससे दूरी बना रहे हैं।
हाथी सवारी में आई इस कमी के मुख्य कारणों में अंतरराष्ट्रीय पशु अधिकार संगठनों और पेटा (PETA) द्वारा चलाए जा रहे क्रूरता-मुक्त पर्यटन अभियान, जानवरों के प्रति बदलती सोच और सफारी की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। पहले जहाँ 20 से 30 मिनट की सवारी का किराया ₹700 हुआ करता था, वहीं अब यह बढ़कर ₹2,500 तक पहुँच गया है। इसके अलावा, हाथियों के साथ होने वाले हादसों और हाथियों पर होने वाले शारीरिक व मानसिक अत्याचार की खबरों ने भी पर्यटकों को इससे दूर किया है।
दूसरी ओर, अब जिम्मेदार और नैतिक पर्यटन (Ethical Tourism) को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों का क्रेज बढ़ रहा है। पर्यटक अब 'हाथी गाँव' (Hathi Gaon) जाना पसंद कर रहे हैं, जहाँ वे हाथियों को प्राकृतिक माहौल में देख सकते हैं। यहाँ पर्यटकों को हाथियों को खाना खिलाने, नहलाने और उन पर प्राकृतिक रंगों से पेंटिंग करने जैसे अनुभव मिलते हैं, जिससे हाथियों को बिना कोई तनाव दिए लोग उनके साथ समय बिता पाते हैं।