जयपुर न्यूज डेस्क: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रेस कोर्स क्षेत्र स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड को खाली कराने का रास्ता साफ हो गया है। दिल्ली की एक अदालत ने भारतीय पोलो संघ (IPA) को केंद्र सरकार के बेदखली आदेश के खिलाफ अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। इसके बाद केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने 15.20 एकड़ में फैले जयपुर पोलो ग्राउंड का भौतिक कब्जा ले लिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने 12 जून को पारित आदेश में कहा कि इसी तरह की राहत की मांग पहले पटियाला हाउस कोर्ट के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष भी की गई थी, लेकिन वहां भी कोई अंतरिम राहत नहीं मिली। ऐसे में न्यायिक अनुशासन और मर्यादा को देखते हुए अदालत बेदखली आदेश के अमल पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है।
हालांकि अदालत ने केंद्र सरकार को अपील और स्थगन आवेदन पर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 जून को अवकाशकालीन न्यायाधीश के समक्ष निर्धारित की है।
यह विवाद लुटियंस दिल्ली स्थित ऐतिहासिक जयपुर पोलो ग्राउंड से जुड़ा है। केंद्र सरकार का कहना है कि पोलो ग्राउंड और आसपास की कुछ अन्य संपत्तियों, जिनमें दिल्ली जिमखाना क्लब भी शामिल है, की भूमि को सार्वजनिक उपयोग के लिए अपने नियंत्रण में लिया जाना प्रस्तावित है।
भारतीय पोलो संघ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अक्षय माखीजा ने अदालत से आग्रह किया था कि अगली सुनवाई तक बेदखली आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए, अन्यथा अपील का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। लेकिन अदालत ने यह मांग स्वीकार नहीं की।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय पोलो संघ ने पहले दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां अंतरिम राहत की मांग की गई थी, लेकिन वहां भी कोई संरक्षण नहीं मिला। हाईकोर्ट ने मामले को निचली अदालत के समक्ष लंबित स्थगन आवेदन के निपटारे के लिए छोड़ दिया था।
इस बीच भारतीय पोलो संघ ने बेदखली कार्रवाई को “मनमानी, अनुचित और कानून के विपरीत” बताते हुए कहा है कि वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान राजधानी में हरित क्षेत्रों और विरासत संरचनाओं के भविष्य को लेकर चिंता जताई थी। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि लगातार बढ़ते हाईराइज निर्माण और प्रदूषण के बीच दिल्ली के खुले और हरित क्षेत्रों को बचाना जरूरी है।