जयपुर न्यूज डेस्क: जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में मतदान खत्म होने के बाद बीजेपी ने अपने सभी उम्मीदवारों को प्रदेश कार्यालय बुलाया है। पार्टी नेताओं के साथ बैठक के बाद प्रत्याशियों को जयपुर से बाहर होटल या रिसॉर्ट में ले जाने की तैयारी है। पार्टी की ओर से इसे प्रशिक्षण और संगठन से जुड़ी गतिविधियों का नाम दिया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक तौर पर इसे चुनाव नतीजों के बाद अपने संभावित विजेता पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति माना जा रहा है।
पार्टी की योजना के मुताबिक, प्रत्याशियों को अगले तीन दिनों तक होटल या रिसॉर्ट में रखा जाएगा। 14 सितंबर को मतगणना होने तक सभी उम्मीदवार वहीं रहेंगे। नतीजे आने के बाद जो उम्मीदवार जीतेंगे, उन्हें भी तुरंत घर नहीं भेजा जाएगा। बीजेपी के निर्वाचित पार्षदों को 21 सितंबर को प्रस्तावित मेयर चुनाव तक होटल या रिसॉर्ट में ही रखने की तैयारी है। वहीं हारने वाले प्रत्याशियों को मतगणना वाले दिन शाम के बाद जाने की अनुमति दी जाएगी।
इस पूरी कवायद के पीछे सबसे बड़ी वजह मेयर चुनाव को माना जा रहा है। निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद पार्षदों के बीच राजनीतिक जोड़तोड़ और पाला बदलने की संभावनाएं बनी रहती हैं। ऐसे में बीजेपी अपने विजयी पार्षदों को एक जगह रखकर मेयर चुनाव तक पार्टी के साथ मजबूती से जोड़े रखना चाहती है। खासकर निर्दलीय और दूसरे दलों के संभावित संपर्क को देखते हुए इसे पार्टी की रणनीतिक तैयारी माना जा रहा है।
राजस्थान में बीजेपी की यह रणनीति सिर्फ जयपुर तक सीमित नहीं है। भरतपुर नगर निगम के बीजेपी प्रत्याशियों को पहले ही जयपुर लाकर दिल्ली रोड स्थित लोहागढ़ रिसॉर्ट में ठहराया गया है। पार्टी इसे प्रशिक्षण और संगठनात्मक कार्यक्रम बता रही है। हालांकि चुनाव के बाद उम्मीदवारों या पार्षदों को होटल-रिसॉर्ट में रखने की राजनीति राजस्थान में पुरानी है। इससे पहले भी निकाय और विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टियां अपने संभावित विजेता उम्मीदवारों को एक साथ रखकर राजनीतिक समीकरणों को संभालने की कोशिश करती रही हैं।