जयपुर न्यूज डेस्क: राजस्थान एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा गिरफ्तार की गई कथित जैश-ए-मोहम्मद स्लीपर सेल ऑपरेटिव बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा से पूछताछ में कई अहम सुराग सामने आए हैं। सात दिन की रिमांड के दौरान जांच एजेंसियों को ऑनलाइन कट्टरपंथी गतिविधियों, युवतियों की भर्ती की कोशिशों और सुरक्षा बलों के जवानों को निशाना बनाने वाले कथित हनी-ट्रैप मॉड्यूल से जुड़े संकेत मिले हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बबीता पिछले करीब दो वर्षों से पाकिस्तान स्थित कथित हैंडलर्स के संपर्क में थी। जांच में उसके इंटरनेट उपयोग और डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है। एजेंसियों को उसके ऑनलाइन सर्च इतिहास में कथित तौर पर आत्मघाती हमलों और कट्टरपंथी सामग्री से जुड़े विषय मिले हैं। उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि उसके संपर्कों और गतिविधियों की पूरी जानकारी जुटाई जा सके।
प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय सेना के जवानों से संपर्क स्थापित करने और उन्हें कथित तौर पर हनी-ट्रैप में फंसाने की कोशिश कर रही थी। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के लोगों से उसके संपर्क होने और कुछ युवतियों को प्रभावित कर उन्हें कट्टरपंथी नेटवर्क से जोड़ने के प्रयासों की भी जांच की जा रही है। एजेंसियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए कथित रूप से फैलाए जा रहे चरमपंथी प्रचार की भी पड़ताल कर रही हैं।
जांच का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू कथित वित्तीय लेनदेन और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए फंडिंग से जुड़ा है। अधिकारियों के अनुसार, बबीता कई मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करती थी और समय-समय पर चैट, फोटो और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड डिलीट कर देती थी। फिलहाल फॉरेंसिक विशेषज्ञ डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने में जुटे हैं। ATS उसकी डिजिटल गतिविधियों, वित्तीय लेनदेन, संपर्कों और संचार नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर की जाएगी।