जयपुर न्यूज डेस्क: मोटे मुनाफे का लालच देकर हजारों लोगों से ढाई हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नेक्सा एवरग्रीन के संचालक सुभाष बिजारणिया को गिरफ्तार किया है। ईडी जयपुर की टीम ने मंगलवार को उसे अदालत में पेश किया, जहां से आरोपी को चार दिन की रिमांड पर भेज दिया गया। पूछताछ के दौरान इस मामले से जुड़े दूसरे आरोपियों और पैसों के लेन-देन को लेकर अहम जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
2021 में शुरू हुआ था नेटवर्क
जांच के मुताबिक, सुभाष बिजारणिया ने वर्ष 2021 में अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ मिलकर निवेश के नाम पर लोगों को जोड़ना शुरू किया। शुरुआत सीकर से हुई और बाद में झुंझुनूं, चूरू, जयपुर समेत राजस्थान के कई जिलों में नेटवर्क फैल गया। इसके बाद देश के दूसरे राज्यों में भी कंपनी के दफ्तर खोले गए।
आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए 62 हजार से ज्यादा लोगों से ढाई हजार करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई गई। निवेशकों को भरोसा दिलाया गया कि उनकी रकम पर उन्हें हर सप्ताह भारी मुनाफा मिलेगा।
धोलेरा स्मार्ट सिटी के नाम पर निवेश का लालच
आरोपियों ने नेक्सा एवरग्रीन नाम से कंपनी बनाई थी। लोगों को गुजरात के अहमदाबाद के पास धोलेरा में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े निवेश का झांसा दिया गया। दावा किया गया कि इस प्रोजेक्ट में पैसा लगाने पर हर सप्ताह करीब तीन प्रतिशत मुनाफा मिलेगा।
शुरुआत में कुछ निवेशकों को मुनाफे की रकम दी गई, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ता गया। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने लाखों रुपये तक निवेश कर दिए। आरोप है कि जब बड़ी रकम जमा हो गई तो कंपनी के दफ्तर बंद कर दिए गए और संचालक फरार हो गए।
कई जिलों में दर्ज हुए मामले
कंपनी के दफ्तर अचानक बंद होने के बाद निवेशकों में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। सीकर, झुंझुनूं और जयपुर समेत कई जिलों में नेक्सा एवरग्रीन के संचालकों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए।
निवेशकों ने कार्रवाई की मांग को लेकर जयपुर में भी कई बार प्रदर्शन किया। एक प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग पानी की टंकी पर चढ़ गए थे। पुलिस के कार्रवाई के आश्वासन के बाद उन्हें नीचे उतारा गया।
ईडी ने करीब एक दर्जन ठिकानों पर की थी छापेमारी
मामले में कथित तौर पर ढाई हजार करोड़ रुपये से अधिक की रकम के लेन-देन का पता चलने के बाद ईडी ने भी जांच शुरू की। करीब एक साल पहले एजेंसी ने सीकर, झुंझुनूं और जयपुर समेत कई जगहों पर छापेमारी की थी।
जांच के दौरान कंपनी और आरोपियों से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई भी की गई। ईडी अब मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से यह पता लगाने में जुटी है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम कहां और किन लोगों के जरिए भेजी गई।
चेन सिस्टम के जरिए बढ़ाया गया नेटवर्क
नेक्सा एवरग्रीन पर आरोप है कि कंपनी ने सिर्फ मुनाफे का लालच ही नहीं दिया, बल्कि नए निवेशक जोड़ने पर कमीशन का भी वादा किया। इसी वजह से कई निवेशकों ने अपने परिचितों और रिश्तेदारों को भी इस योजना में पैसा लगाने के लिए तैयार किया।
इस तरह धीरे-धीरे पूरा नेटवर्क चेन सिस्टम की तरह फैलता गया और 62 हजार से ज्यादा लोग कथित तौर पर इसके जाल में फंस गए। अब ईडी की जांच का फोकस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों, निवेशकों से जुटाई गई रकम और उसके इस्तेमाल पर है।