जयपुर न्यूज डेस्क: जयपुर के चर्चित नीरज शर्मा हत्याकांड में जांच आगे बढ़ने के साथ नए सवाल भी सामने आ रहे हैं। अब मृतका के परिजनों ने स्थानीय पुलिस की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि अगर पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती तो नीरज शर्मा की जान बचाई जा सकती थी। इस संबंध में परिजनों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।
परिजनों के मुताबिक, नीरज शर्मा ने 1 मार्च 2026 को सांगानेर थाने में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने उनके घर में घुसकर मारपीट की, कपड़े फाड़े, करीब 15 लाख रुपये के नकदी और जेवर लूट लिए तथा मकान पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने न तो एफआईआर दर्ज की और न ही शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई की। उनका कहना है कि इसी लापरवाही ने आरोपियों के हौसले बढ़ाए और बाद में हत्या जैसी वारदात हुई।
परिवार ने नीरज शर्मा के पति विजय शर्मा की वर्ष 2025 में हुई मौत पर भी सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि पति की मौत, चोरी की घटना और नीरज शर्मा की हत्या एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए दोनों मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। साथ ही, शुरुआती शिकायत पर कार्रवाई न करने वाले पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।
गौरतलब है कि 4 जुलाई 2026 को प्रतापनगर क्षेत्र में 45 वर्षीय नीरज शर्मा की स्कॉर्पियो की टक्कर से मौत हुई थी। शुरुआत में इसे सड़क हादसा माना गया, लेकिन बाद की जांच में पुलिस ने इसे सुनियोजित हत्या बताया। पुलिस के अनुसार, मृतका की बेटी आयुषी शर्मा सरकारी नौकरी पाने के लालच में साजिश का हिस्सा थी। इस मामले में आयुषी समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि उसका चचेरा भाई बलराम अभी भी फरार है।