जयपुर न्यूज डेस्क: राजस्थान एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार बाबिता धाकड़ के मोबाइल फोन से डिलीट किए गए डेटा की जांच कर रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह मामला राजस्थान में किसी महिला को कथित तौर पर स्लीपर सेल ऑपरेटिव के रूप में तैयार करने की पहली कोशिश हो सकता है।
एटीएस अधिकारियों के अनुसार, मोबाइल फोन को डिलीट की गई चैट, मीडिया फाइलों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को रिकवर करने के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) भेजा गया है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बाबिता के संपर्क कितने व्यापक थे और क्या उसने अन्य लोगों को भी कथित तौर पर कट्टरपंथ की ओर प्रभावित करने का प्रयास किया था। इसके साथ ही 100 से अधिक संदिग्ध सोशल मीडिया प्रोफाइल और उसके ऑनलाइन संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में मोबाइल से कथित तौर पर यूसुफ अजहर उर्फ उस्ताद गौरी और कारी जरार समेत जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध ऑपरेटिव्स के साथ ऑनलाइन बातचीत के संकेत मिले हैं। इन संपर्कों की प्रामाणिकता की पुष्टि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की मदद से की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, बाबिता के फेसबुक अकाउंट पर करीब 370 फ्रेंड्स थे, जिनमें से कई प्रोफाइल पाकिस्तान और अन्य देशों से जुड़े होने की आशंका है।
एटीएस ने बताया कि मोबाइल से दो सिम कार्ड भी बरामद हुए हैं और गिरफ्तारी से पहले बड़ी मात्रा में डेटा डिलीट किए जाने के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसी अब संदिग्ध संपर्कों के रिकॉर्ड का मिलान एनआईए के डेटाबेस से कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के सत्यापन के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।