जयपुर न्यूज डेस्क: जयपुर डेयरी की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक अनोखी योजना "सरस लाडो मायरा" की शुरुआत की जा रही है। इस योजना के तहत जयपुर डेयरी से जुड़े दुग्ध उत्पादकों की बेटियों की शादी में मायरे के रूप में 21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को आर्थिक संबल देना और पारंपरिक रीति-रिवाजों को सम्मान देना है।
राजस्थान में मायरे की परंपरा काफी प्रचलित है, खासकर मारवाड़ी समुदाय में इसे बड़े उत्सव की तरह मनाया जाता है। मायरे में भाई बहन को शादी के समय गहनों, नकद राशि, गाड़ी, ट्रैक्टर, जमीन और मिठाइयों समेत कई चीजें भेंट करता है। नागौर जैसे जिलों में मायरा कई बार करोड़ों रुपये का होता है, जो पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन जाता है।
हाल ही में नागौर के सेखासनी गांव में रिकॉर्डतोड़ मायरा देखने को मिला था, जिसमें दो भाइयों ने अपनी बहन को शादी में करीब 13.71 करोड़ रुपये का मायरा दिया। इसमें ट्रैक्टर, बोलेरो गाड़ी, 5 किलो चांदी, 1.6 किलो सोना, 6 प्लॉट, 80 बीघा जमीन और 1.31 करोड़ रुपये नकद शामिल थे। जयपुर डेयरी की यह नई योजना भले ही इतनी बड़ी न हो, लेकिन इसका उद्देश्य उस परंपरा को बनाए रखते हुए हर वर्ग की बेटी को मायरे का सम्मान देना है।