जयपुर न्यूज डेस्क: सीमा शुल्क विभाग (Customs Department) ने भारत में भूटान मूल की महंगी एसयूवी (SUVs) और एमयूवी (MUVs) गाड़ियों के अवैध आयात और उनके फर्जी रजिस्ट्रेशन के बड़े रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए 'ऑपरेशन नमकखोर' (Operation Numkhor) चला रखा है। इसी राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत विभाग को एक और बड़ी कामयाबी मिली है, जिसमें जयपुर से 23 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। इस नई गिरफ्तारी के साथ ही इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक चार राज्यों से कुल सात लोगों को दबोचा जा चुका है।
जयपुर से हुई सातवीं गिरफ्तारी:
आरोपी की पहचान: गिरफ्तार किए गए 23 वर्षीय आरोपी की पहचान यश के रूप में हुई है, जो राजस्थान के जयपुर का रहने वाला है। उसे सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (Customs Act, 1962) के कड़े प्रावधानों के तहत 27 मई को गिरफ्तार किया गया।
सोशल मीडिया के जरिए डीलिंग: जांचकर्ताओं के अनुसार, यश इस पूरे तस्करी नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ (Intermediary) यानी दलाल की भूमिका निभा रहा था। वह फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन अवैध विदेशी गाड़ियों को भारतीय खरीदारों तक पहुंचाने और उनकी बिक्री को आसान बनाने का काम करता था।
खुद के नाम पर भी गाड़ियां: सीमा शुल्क विभाग द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि यश खुद भी ऐसी दो से अधिक तस्करी कर लाई गईं लग्जरी गाड़ियों का रजिस्टर्ड मालिक बना हुआ था।
पहले गिरफ्तार हो चुके मुख्य सरगना और अधिकारी:
यश ने इस रैकेट के मुख्य मास्टरमाइंड्स के साथ मिलकर काम किया था। इस मामले में पहले ही निम्नलिखित मुख्य आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है:
बिस्वदीप दास: इस पूरे अंतरराज्यीय गाड़ी तस्करी रैकेट का मुख्य सरगना (Kingpin)।
जैन मारवा: केरल के कोझिकोड स्थित 'मैसर्स रोडवे कार्स' (M/s Roadway Cars) का पार्टनर।
दीपक पोटावरी: असम के बोंगईगांव में तैनात जिला परिवहन कार्यालय (DTO) का एक सरकारी अधिकारी, जिसने इन गाड़ियों के फर्जी कागजात और भारतीय रजिस्ट्रेशन तैयार करने में मदद की।
चार अन्य आरोपी: रैकेट में शामिल अन्य सहयोगी।
आगे की कार्रवाई:
कस्टम अधिकारियों का कहना है कि यह एक बेहद गंभीर और संगठित अपराध का मामला है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर टैक्स चोरी और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से बिना कस्टम ड्यूटी चुकाए लग्जरी वाहनों को भारत में खपाया जा रहा था। कस्टम विभाग अब इस जांच से जुड़े सभी अहम तथ्य और सबूत अन्य केंद्रीय व राज्य जांच एजेंसियों के साथ भी साझा करने जा रहा है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद किया जा सके। मामले में आगे की गहन जांच जारी है।