जयपुर न्यूज डेस्क: राज्य विधानसभा में सोमवार को महाराजा कॉलेज और महारानी कॉलेज की जमीन जेडीए और जेएमसी को ट्रांसफर किए जाने का मुद्दा गूंजा। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के विधायकों ने इस पर आपत्ति जताते हुए सरकार से भूमि हस्तांतरण रद्द करने की मांग की।
भाजपा के मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ ने कहा कि दोनों कॉलेज संरक्षित धरोहर श्रेणी में आते हैं, इसलिए उनकी जमीन किसी भी हालत में ट्रांसफर नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जमीन हस्तांतरण के बाद कॉलेजों के पास अपनी भूमि नहीं बची है, जिससे नए भवन निर्माण और नए कोर्स शुरू करने में बाधा आएगी। साथ ही यूजीसी अनुदान मिलने पर भी असर पड़ सकता है।
वहीं शाहपुरा से कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने आरोप लगाया कि महाराजा कॉलेज की 48 बीघा और महारानी कॉलेज की 29 बीघा जमीन अवैध रूप से जेडीए और जेएमसी को हस्तांतरित की गई है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से छात्र और शिक्षाविद नाराज हैं और भविष्य में व्यावसायिक उपयोग या नीलामी की आशंका से संस्थानों की ऐतिहासिक पहचान और स्वायत्तता खतरे में पड़ सकती है।
दोनों विधायकों ने सरकार से मांग की कि जमीन का हस्तांतरण तुरंत रद्द कर संबंधित कॉलेजों के नाम दोबारा दर्ज किया जाए, ताकि राज्य की शैक्षणिक धरोहर और संस्थानों की स्वायत्त पहचान सुरक्षित रह सके।