जयपुर न्यूज डेस्क: राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया जब राजस्थान विधानसभा, राजस्थान हाईकोर्ट और सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी मिली। ईमेल के जरिए दी गई इस धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गईं और राज्य के सबसे संवेदनशील उच्च-सुरक्षा क्षेत्रों में तुरंत तलाशी अभियान शुरू किया गया।
सुरक्षा घेरा और सर्च ऑपरेशन:
धमकी भरे संदेश सुबह अदालती प्रशासन के आधिकारिक ईमेल खातों पर प्राप्त हुए, जिनमें दावा किया गया था कि इमारतों के भीतर विस्फोटक रखे गए हैं। इसके तुरंत बाद विधानसभा परिसर के लिए भी ऐसी ही सूचना मिली। सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए जयपुर पुलिस, बम निरोधक दस्ते (BDS) और डॉग स्क्वायड ने मोर्चा संभाला। विधानसभा अध्यक्ष सहित सैकड़ों कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और अधिकारियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया।
धमकी के पीछे का पैटर्न:
जांचकर्ताओं के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में राजस्थान हाईकोर्ट को धमकी मिलने की यह चौथी घटना है। हालांकि पिछली सभी धमकियां 'होक्स' (फर्जी) साबित हुई थीं, लेकिन बार-बार हो रही इन घटनाओं ने जयपुर साइबर सेल पर दबाव बढ़ा दिया है। शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि ईमेल भेजने वाले ने अपनी पहचान छिपाने के लिए 'मास्क' आईपी एड्रेस का इस्तेमाल किया है।
मामले पर सियासी घमासान:
इस घटना ने राज्य में एक बड़ा राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है। तलाशी अभियान के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और विपक्ष के नेता टीकाराम जूली को विधानसभा परिसर में प्रवेश करने से कथित तौर पर रोक दिया गया। दोनों नेताओं ने गेट के बाहर मीडिया से बात करते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा और राज्य की कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए।
फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां उन डिजिटल निशानों की तलाश कर रही हैं जिससे इस शरारत या साजिश के पीछे के असली चेहरे का पता लगाया जा सके।