जयपुर न्यूज डेस्क: राजस्थान के जयपुर ग्रामीण इलाके के बिवाल परिवार की कहानी कभी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में सफलता का बड़ा उदाहरण मानी जा रही थी। साल 2025 में परिवार के पांच सदस्यों के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चयन के बाद सोशल मीडिया से लेकर कोचिंग संस्थानों तक उनकी जमकर चर्चा हुई थी। परिवार के सदस्य दिनेश बिवाल ने उस समय सोशल मीडिया पर इसे गर्व का पल बताते हुए बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी थीं। लेकिन अब यही परिवार कथित NEET पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों के निशाने पर है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच में सामने आया है कि दिनेश बिवाल, उनके भाई मंगीलाल और भतीजे विकास को NEET 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि परिवार के कई सदस्यों का मेडिकल कॉलेजों में चयन महज संयोग था या इसके पीछे कथित पेपर लीक नेटवर्क की भूमिका थी। जांच में छात्रों के पुराने शैक्षणिक रिकॉर्ड और NEET स्कोर का भी विश्लेषण किया जा रहा है।
जांच के दौरान कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। मंगीलाल के बेटे विकास ने जहां कक्षा 10 में 63 प्रतिशत और 12वीं में 55 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, वहीं NEET 2025 में उसे 85.11 पर्सेंटाइल मिला और सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज में सीट मिली। इसी तरह परिवार की अन्य सदस्य प्रगति, गुंजन, सानिया और पलक के पुराने अकादमिक रिकॉर्ड और कोचिंग टेस्ट औसत स्कोर की तुलना में NEET प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एजेंसियां इन सभी चयन प्रक्रियाओं की जांच कर रही हैं।
CBI के अनुसार इस कथित नेटवर्क की कड़ियां महाराष्ट्र और राजस्थान तक फैली हुई हैं। जांच में पुणे निवासी यश यादव और नासिक के शुभम खैरनार का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि अप्रैल 2026 में लीक पेपर की डील फाइनल हुई और फिर उम्मीदवारों को कथित तौर पर पेपर उपलब्ध कराया गया। गुरुवार को CBI ने बिवाल परिवार के ठिकानों पर छापेमारी कर कई दस्तावेज और लग्जरी वाहनों की जांच की। वहीं दिनेश बिवाल का बेटा ऋषि, जो इस साल NEET अभ्यर्थी बताया जा रहा है, फिलहाल फरार है और उसकी तलाश जारी है।