आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले करदाताओं के लिए अब सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। आयकर विभाग ने कर चोरी और गलत जानकारी देने वालों पर लगाम कसने के लिए पेनाल्टी के नियमों को पहले से कहीं अधिक सख्त कर दिया है। नए प्रावधानों के तहत, यदि कोई करदाता अपनी आय को कम रिपोर्ट (Under-reporting) करता है, तो उसे टैक्स राशि का 50 फीसदी जुर्माना देना होगा। वहीं, यदि यह पाया गया कि जानकारी जानबूझकर छिपाई गई है या गलत प्रविष्टियाँ (Misreporting) की गई हैं, तो यह जुर्माना बढ़कर 200 फीसदी तक पहुँच सकता है।
विभाग ने केवल आय छिपाने पर ही नहीं, बल्कि प्रक्रियात्मक देरी पर भी शिकंजा कसा है। निर्धारित समय सीमा के बाद रिटर्न फाइल करने पर 5,000 रुपये तक की लेट फीस अनिवार्य कर दी गई है, हालांकि छोटे करदाताओं (5 लाख तक की आय) के लिए इसे 1,000 रुपये तक सीमित रखा गया है। इसके अलावा, टीडीएस (TDS) स्टेटमेंट में देरी करने वाले संस्थानों और व्यक्तियों पर 200 रुपये प्रतिदिन का शुल्क लगाया जाएगा। अघोषित आय (Undisclosed Income) पकड़े जाने की स्थिति में विभाग परिस्थितियों के आधार पर 10% से 60% तक का जुर्माना वसूलने का अधिकार रखता है।
विशेष रूप से क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) और डिजिटल एसेट्स में निवेश करने वाले वर्ग के लिए विभाग ने 'रेड अलर्ट' जारी किया है। क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की जटिलता के कारण रिपोर्टिंग में होने वाली मामूली चूक भी भारी आर्थिक दंड का कारण बन सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि करदाताओं को अपने सभी निवेशों और विदेशी संपत्तियों का पूरा विवरण पारदर्शी तरीके से देना होगा। हालांकि, नियमों में यह भी प्रावधान है कि यदि करदाता अपनी गलती के पीछे कोई 'उचित कारण' पेश करने में सफल रहता है, तो उसे जुर्माने से राहत दी जा सकती है।