नयी दिल्ली: भारत और वियतनाम के बीच प्रगाढ़ होते आर्थिक संबंधों में एक नया मील का पत्थर तब जुड़ा जब बुधवार, 06 मई 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने वियतनामी समकक्ष न्गो वान तुआन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के 10 सफल वर्षों का जश्न मनाना और उभरती वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच आपसी सहयोग को और अधिक विस्तार देना रहा।
कर सुधार और तकनीकी नवाचार पर चर्चा
बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं की स्थिरता और विकास के मॉडलों पर गहन चर्चा की।
-
भारत का अनुभव: वित्त मंत्री सीतारमण ने भारत के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर सुधारों, विशेष रूप से फेसलेस असेसमेंट और प्रौद्योगिकी-संचालित प्रणालियों की सफलता को साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे इन नवाचारों ने देश में पारदर्शिता और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा दिया है।
-
वियतनाम की रुचि: न्गो वान तुआन ने भारत के MSME विकास मॉडल और सार्वजनिक निवेश के माध्यम से आर्थिक गति को बढ़ाने के अनुभवों को सीखने में गहरी रुचि दिखाई। वियतनाम विशेष रूप से भारत के कर प्रशासन के आधुनिकीकरण से प्रभावित दिखा।
बुनियादी ढांचा और पीएम गतिशक्ति
भारत ने अपने एकीकृत बुनियादी ढांचा विकास प्लेटफॉर्म 'PM GatiShakti' की बारीकियों को वियतनामी प्रतिनिधिमंडल के सामने रखा।
-
एकीकृत ढांचा: वियतनाम ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए इस प्रौद्योगिकी-सक्षम ढांचे को अपने यहाँ लागू करने की संभावनाओं पर विचार करने की इच्छा जताई।
-
क्षेत्रीय सहयोग: दोनों देशों ने ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, नवाचार और एआई (AI) कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
निर्मला सीतारमण ने वियतनाम के मजबूत संस्थागत सुधारों और वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chains) में उसके बढ़ते एकीकरण की सराहना की। इस वार्ता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों दक्षिण एशियाई देश न केवल रक्षा बल्कि वित्तीय और ढांचागत क्षेत्रों में भी एक-दूसरे के पूरक